अंपायर के निर्णय का महत्व

भारत और जापान के बीच एशियन गेम्स 2026 के मुकाबले में उस समय विवाद उत्पन्न हुआ जब अंतिम ओवर में अंपायर ने अक्षर पटेल की गेंद को वाइड करार दिया। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने अपने फैसले को बदल दिया, जिससे खेल में हलचल मच गई।

भारतीय अंपायर अनिल चौधरी ने इस मुद्दे पर एक वीडियो साझा कर स्पष्ट किया कि गेंद वाइड नहीं थी। उन्होंने बताया कि रिवर्स स्वीप और स्विच हिट जैसे शॉट्स के कारण वाइड का नियम समझने में मुश्किल हो गई है।

  • अगर गेंद बल्लेबाज के लेग साइड से काफी बाहर पहुंच जाती है, तो इसे वाइड माना जाता है।
  • ICC के नियमों के अनुसार, यदि गेंद बल्लेबाज की पहुंच में है और वह सामान्य शॉट से खेल सकता है, तो वह वाइड नहीं होगी।
  • अंपायर के पास कुछ परिस्थितियों में अपना फैसला बदलने का अधिकार होता है।

चौधरी के अनुसार, अंपायर को यह ध्यान रखना होता है कि क्या बल्लेबाज उस गेंद को सामान्य शॉट से खेल सकता था या नहीं। यदि बल्लेबाज ने गेंद को खेलने की कोशिश की और गेंद उसकी पहुंच में थी, तो यह वाइड नहीं मानने का एक तर्क हो सकता है।

हालांकि, अंपायर का यह मानना भी हो सकता है कि गेंद इतनी दूर थी कि बल्लेबाज के लिए सामान्य शॉट खेलना मुश्किल था। इसलिए इस निर्णय पर बहस हो सकती है। ICC हमेशा चाहता है कि अंपायर एक समान फैसले लें, ताकि गेंदबाज जानबूझकर बल्लेबाज को दूर से गेंद डालकर फायदा न उठा सकें।

इस संदर्भ में, चौधरी ने यह भी बताया कि अंपायर को अचानक अपने फैसले को बदलने की अनुमति है, जैसा कि पहले भी देखा गया है। ऐसे उदाहरणों में अंपायर अपने निर्णय को तुरंत सुधारने का अधिकार रखते हैं, जो खेल के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है।