- अधिकांश कंपनियां युवाओं को दूसरे राज्यों में नौकरी का प्रस्ताव दे रही हैं।
- कार्य के लिए दिए जा रहे वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है।
- कई युवाओं ने आरोप लगाया कि ये मेले सिर्फ बायोडाटा संग्रहण के लिए आयोजित हो रहे हैं।
बिहार में रोजगार मेले की वास्तविकता: 15-16 हजार की सैलरी पर दूसरी जगह नौकरी का प्रस्ताव
पटना के ज्ञान भवन में आयोजित रोजगार मेले में 112 कंपनियों ने भाग लिया, लेकिन स्थानीय रोजगार की समस्या ने सवाल उठाए हैं। युवाओं का कहना है कि 15 हजार की सैलरी पर चेन्नई जाकर क्या खाया जाएगा?
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21 August 2026 · 12:12 PM · 38 views
पटना में आयोजित रोजगार मेला एक बार फिर से युवाओं की उम्मीदों पर पानी फेरता नजर आ रहा है। ज्ञान भवन में हो रहे इस मेले में करीब 112 कंपनियां शामिल हुईं, लेकिन बिहार की मात्र 6 कंपनियों का होना स्थानीय रोजगार के अवसरों पर सवाल खड़ा करता है। यहाँ यह सवाल उठता है कि क्या सरकार सच में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करने के लिए गंभीर है?रोजगार मेले में आए युवाओं की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि वे बेहतर वेतन और स्थाई नौकरी की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन यहाँ उन्हें जो ऑफर मिल रहे हैं, वह महज 10 से 16 हजार के बीच हैं। इसके साथ ही इन्हें बाहर जाकर काम करने के लिए कहा जा रहा है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।नौकरी या मजदूरी?पटना के मुन्ना की बात करें तो उन्होंने कहा, 'यहाँ नौकरी तो दी जा रही है, लेकिन इतना वेतन कैसे चल सकेगा?' युवा तकनीकी और बेहतर अवसरों की तलाश में आए थे, लेकिन अधिकांश ऑफर सामान्य मजदूरी, सेल्स और डिलीवरी से जुड़े थे। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि बिहार में रोजगार सृजन के लिए कंपनियों का प्रयास उचित नहीं दिखता।
Source: Bhaskar
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