ब्रिक्स सम्मेलन का महत्व

हाल ही में भारत ने ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस सम्मेलन को 'बहुत बंटी हुई दुनिया' के बीच आम सहमति बनाते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि इस सम्मेलन ने वैश्विक मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा दिया है, जो आज के समय की आवश्यकता है।

जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह सम्मेलन उन जटिल मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है, जो विश्व के कई हिस्सों में शांति और सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।

  • सम्मेलन में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई।
  • पश्चिम एशिया संघर्ष को रखा गया सबसे कठिन विषय।
  • सदस्य देशों के बीच सहयोग और समन्वय बढ़ाने पर चर्चा हुई।

जयशंकर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस सम्मेलन ने वैश्विक स्तर पर सहयोग के महत्व को उजागर किया है। उन्होंने इसके परिणामों को सकारात्मक बताया और सभी सदस्यों के बीच एकजुटता की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

ब्रिक्स सम्मेलन में लिए गए निर्णय और घोषणाएं, भविष्य में विश्व राजनीति और कूटनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं। जयशंकर का मानना है कि इस तरह के प्लेटफार्म पर चर्चा करना, देशों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देगा और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सहायक होगा।