बच्चों की शिक्षा पर आ रहा संकट

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गैरतगंज तहसील में देवनगर की एक स्थिति ने शिक्षा के अधिकार पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में बच्चे स्कूल जाते हुए कीचड़ भरे रास्तों पर चलते दिखाई दे रहे हैं। उनके पास स्कूल बैग हैं, लेकिन पैरों में चप्पल या जूते नहीं हैं, जिससे उनकी हालत और भी खराब होती है।

गांव के निवासी बताते हैं कि ये बच्चे प्रतिदिन इस कठिनाइयों से गुजरते हैं। कई बार वे गिरकर घायल हो जाते हैं और उन्हें स्कूल पहुंचने में काफी समय लग जाता है। स्थानीय स्कूल के शिक्षक भी इस समस्या को लेकर पंचायत प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं और सड़क निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।

  • बच्चों को कीचड़ भरे रास्ते पर चलने में कठिनाई होती है।
  • सांप-बिच्छू के काटने का खतरा हमेशा बना रहता है।
  • पंचायत प्रशासन से कई बार सड़क की मांग की जा चुकी है।

यह स्थिति केवल एमपी तक सीमित नहीं है। बिहार के गया जिले के कईया गांव में भी बच्चे घुटने तक पानी पार कर स्कूल जाते हैं। यहां कोई पुल नहीं होने के कारण बारिश के समय बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं और उनके साथ डूबने का खतरा बना रहता है।

ऐसा ही एक और वीडियो बुरहानपुर जिले के देवला ग्राम पंचायत से आया है, जिसमें बच्चे कीचड़ में सिर पर किताबें लेकर स्कूल से लौट रहे हैं। वे वीडियो में प्रशासन से सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत बच्चों को सुरक्षित और सुगम रास्तों पर स्कूल जाने का अधिकार है। लेकिन मौजूदा स्थिति इस अधिकार का जबकि उल्लंघन कर रही है। ऐसे में शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस समस्या का समाधान करें और बच्चों को सुरक्षित शिक्षा का माहौल प्रदान करें।