बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक बार फिर से सरकारी संपत्ति की चोरी की एक च shocking घटना सामने आई है। मुशहरी क्षेत्र के आथर घाट पर स्थित ऐतिहासिक पीपा पुल, जो अब तक क्षेत्र की पहचान रहा है, नशेड़ी युवाओं द्वारा काटकर कबाड़ में बेचा जा रहा है। यह स्थिति प्रशासन की अनदेखी और प्रभावी निगरानी की कमी को दर्शाती है।

यह पुल कई सालों से बेकार पड़ा था और स्थानीय लोग इसकी दुर्दशा की ओर बार-बार प्रशासन का ध्यान खींचते रहे हैं। बावजूद इसके, प्रशासनिक अमला इस मामले में कहीं भी सक्रियता नहीं दिखा सका। अब स्थिति यह है कि इस पुल का लोहा काटकर बेचने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

स्थानीय निवासियों की चिंता

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पुल उनके लिए केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक धरोहर का एक हिस्सा था। इसके समाप्त होने से न केवल एक ऐतिहासिक स्थल का नुकसान हुआ है, बल्कि उन्हें भी यह डर सताने लगा है कि आगे और कौन सी संपत्ति उनकी आंखों के सामने खो जाएंगी।

  • पुल की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
  • स्थानीय युवा नशे के आदी बनकर इस धरोहर को नष्ट कर रहे हैं।
  • प्रशासन की निष्क्रियता के कारण कई अन्य सरकारी संपत्तियों को भी खतरा है।

इस प्रकार की घटनाएँ केवल एक पुल की चोरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक संरचना और प्रशासनिक व्यवस्था में एक व्यापक समस्या का संकेत देती हैं। लोगों ने माँग की है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को इस तरह की घटनाओं पर कड़ा अंकुश लगाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।