भारतीय राजनीति में युवा पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पार्टियां विभिन्न रणनीतियाँ अपनाती हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हालिया 'जेन Z आउटरीच प्रोग्राम' इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा था। लेकिन इस कार्यक्रम को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गंभीर सवाल उठाए हैं।CJP की आलोचनाCJP ने इस कार्यक्रम में शामिल किए गए नेताओं, जैसे नितिन नवीन और स्मृति ईरानी, पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि ये नेता युवा मतदाताओं की वास्तविक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को समझने में असमर्थ हैं।CJP का मानना है कि बीजेपी का यह प्रयास केवल एक प्रचार रणनीति है, जिसका उद्देश्य युवा मतदाताओं को एकतरफा तरीके से प्रभावित करना है। इस कार्यक्रम के तहत युवा वोटरों को लुभाने के लिए जो उपाय किए जा रहे हैं, उन्हें सतही और अधूरे समझा जा रहा है।
  • नितिन नवीन का युवा मतदाताओं से संवाद करने का अनुभव सीमित है।
  •  स्मृति ईरानी की छवि युवा पीढ़ी के साथ पेश करने में समस्या रही है। 
  • CJP का तर्क है कि युवा मतदाता केवल भावनाओं के प्रचार पर भरोसा नहीं करेंगे। 
गौरतलब है कि जेन Z पीढ़ी वह वर्ग है जो सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों का दायित्व बनता है कि वे इन माध्यमों के जरिए सही और सच्ची जानकारी प्रदान करें। इस संदर्भ में CJP ने इस प्रोग्राम की वास्तविकता पर सवाल उठाया है और सभी राजनीतिक नेताओं से युवा मतदाताओं के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की है।इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि आगामी चुनावों में युवा मतदाताओं पर प्रभाव डालना सभी दलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में CJP का यह आरोप राजनीति में एक नई बहस छेड़ सकता है कि क्या राजनीतिक दल युवाओं के प्रति ईमानदार हैं या केवल उन्हें अपने स्वार्थ के लिए उपयोग कर रहे हैं।