मुजफ्फरपुर जिले में जीविका दीदियों के साथ हुए कथित ठगी के मामले ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। शनिवार को जिला विकास आयुक्त (डीडीसी) निशांत सिहारा की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई जिसमें वरीय अधिकारी, बैंककर्मी, जीविका दीदियां और जक्ष संस्था के निदेशक आशुतोष मंगलम मौजूद थे। इस बैठक का उद्देश्य पीएमजीपी योजना के तहत संचालित मशरूम क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा करना था।
जिलाधिकारी की नाराजगी और कार्य की समीक्षा
बैठक के दौरान जक्ष संस्था के निदेशक आशुतोष मंगलम की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई। जीविका दीदियों ने आरोप लगाया कि उनकी संस्था द्वारा जिला प्रशासन को बार-बार गलत जानकारी और शपथपत्र प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे प्रशासन का समय बर्बाद हुआ है। इसके अलावा, दीदियों ने यह भी कहा कि उनके ऋण की राशि वापसी के झांसे में उन्हें ठगा गया है।
- जक्ष संस्था के निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने दीदियों से ऋण की राशि ठगी।
- बैठक में दीदियों ने मांग की कि उनकी ऋण राशि की भरपाई की जाए।
- डीसी ने आशुतोष मंगलम के कार्यों की जांच कराने का निर्देश दिया।
डीडीसी ने बैठक के अंत में सभी ऋणी जीविका दीदियों के बैंक खाते और ऋण खातों का विस्तृत ब्योरा बैंकों में जमा कराने का निर्देश दिया। साथ ही, जक्ष संस्था के सभी कार्यों और कार्यालय स्थल की जांच करने का आदेश एसडीओ पूर्वी को दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक ऋण के भुगतान के लिए शीघ्र समाधान की योजना बनाई जाएगी।
डीडीसी ने स्पष्ट किया कि आशुतोष मंगलम द्वारा किए गए कार्य काफी संतोषजनक नहीं रहे हैं और उन्होंने कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जीविका दीदियों को अन्य उद्यमों के साथ जोड़ने की कोशिशें की जाएंगी।
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